Saturday, 21 January 2017

आरक्षण के साथ भारत का भविष्य

आज यात्राओं के दौरान या किसी भी मण्डली में बैठे लोगों के बीच आरक्षण का मुद्दा चर्चा का मुख्य विषय रहता है। इसके पक्ष विपक्ष में अनेकों तर्क वितर्क दिए जाते हैं, मैं उन सब की बात अभी नहीं करना चाहता अभी सिर्फ इस व्यवस्था के साथ भारत के भविष्य की बात करना चाहता हुँ। मुझमे अब एक भय समां चूका है भारत के भविष्य को लेकर। जिस तरह इस देश के राजनेता वोटों के लिए इस समस्या को गंभीर करते जा रहे हैं भारत का भविष्य अंधकार में जा रहा है। कुछ वर्षों पश्चात् एक ऐसा समय आएगा जब हमारे सिस्टम में आरक्षण एक स्थायी रूप ले चुका होगा और उस समय भारत की जनसंख्या भी एक विकराल रूप धारण कर चुकी होगी, ऐसे समय में जब बेरोजगारी अपने चरम पर होगी। ये ऐसा समय होगा जब सामान्य वर्ग का गुस्सा निश्चित ही रूप से फूटेगा, यहाँ पर यह वर्ग अपने सयंम की सीमा लांघकर आगे बढ़ेगा और विकराल दंगो की स्थिति उत्पन्न होगी, इस क्रांति पर किसी भी प्रकार से नियंत्रण करना लगभग असंभव सा होगा और इसका समाधान सिर्फ एक ही होगा, आरक्षण का अंत !! लेकिन यदि आरक्षण का अंत किया जाता है तो दूसरे वर्ग में भी उतनें ही आक्रोश की स्थिति रहेगी, मतलब दंगे जैसी स्थिति आनी ही है। इसके परिणामो से सभी वैसे वाकिफ ही हैं लेकिन जो सबसे बड़ी चुनौती है वो है देश की अखंडता बनाये रखने की, जो की मुझे बिलकुल भी नहीं लगता ऐसे समय में मुमकिन होगा। ये देश टूटेगा, फिर से भारत और पाकिस्तान वाला समय आएगा और इसी बीच भारत का मुस्लिम समुदाय  एक अलग मुस्लिम देश की फिर से मांग रखेगा। ये होना लगभग निश्चित है अगर आज इसका समाधान नहीं खोजा गया तो ! आज भी आरक्षण के समर्थन में लाखों की भीड़ जमा हो जाती है बसें जलाई जाती हैं, रेल की पटरियां उखाड़ दी जाती हैं,अर्थात इसके विरोध में भी ऐसा ही होना है, लेकिन वो स्थिति और भी भयावह होगी शायद जिसकी आज कोई कल्पना भी नहीं कर रहा होगा। आज भी समय है, बदलाव लाना होगा, इन वोट के कीड़ों को हटाकर फेकना होगा तभी कुछ संभव है वरना इस देश के टुकड़े होने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती !! 

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